आज चाय में फिर चीनी नहीं है , उफ़, ये दिन फिर से वहीं है। उड़ कर आ जाता है रोज़ ये दिन, रात भर सोता नहीं तारे गिन गिन। आज चाय में फिर चीनी नहीं है , अहा, थिरकती हुई उम्मीद, थमी नहीं है। बारिशों में भीगी, भाग कर आई गोदी में मेरी सिमट, ऐसे ही सोयी। आज चाय में फिर चीनी नहीं है , हश्श, मेले में रोशनी कहीं कहीं है। छन छन के आती रही चाँदनी , शहर आज गर्म नहीं है। आज चाय में चीनी सही है , उंह, ये मीठी फिर भी नहीं है। उठ रही है भाप बहुत देर से, चाय अब ठंडी नहीं है।
A friend sent to ponder : CFO asks CEO: "What happens if we invest in developing our people and then they leave us?" CEO replied: "What happens if we don't, and they stay?" ~ yes, friends the cost of not investing is very very high, keep investing and remain invested. ~
बहुत देर से रुके हुए हो चलो कृष्ण आज चलते हैं | बहुत कह लिया बेगानों से चलो कृष्ण आज अपनों को सुनते हैं | बहुत रह लिए किराये के घोंसलों में चलो कृष्ण आज दिल ढूँढ़ते हैं | बहुत शोर है यहाँ सब तरफ़ चलो कृष्ण आज अपने गीत गुनगुनाते हैं | बहुत उम्मीद से लोग नाम लेते हैं चलो कृष्ण आज लिख ही देते हैं | बहुत बहुत हो लिया चलो कृष्ण अब चलो कृष्ण !!!!
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