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चलो कृष्ण अब चलो कृष्ण

बहुत देर से रुके हुए हो  चलो कृष्ण आज चलते हैं | बहुत कह लिया बेगानों से  चलो कृष्ण आज अपनों को सुनते हैं |  बहुत रह लिए किराये के घोंसलों में चलो कृष्ण आज दिल ढूँढ़ते हैं | बहुत शोर है यहाँ सब तरफ़  चलो कृष्ण आज अपने गीत गुनगुनाते हैं |  बहुत उम्मीद से लोग नाम लेते हैं चलो कृष्ण आज लिख ही देते हैं | बहुत बहुत हो लिया  चलो कृष्ण अब चलो कृष्ण !!!!  

आयो कृष्ण अब घर चलते हैं॥

चंद सिक्के हाथ में लिए चला जाता हूँ आज  कुछ खुशिया खरीद लाता हूँ । सोच रहा हूँ बहुत रोज़ से तेरे बारे में आज कुछ देर दर पर दस्तक दिए आता हूँ ।  चंद अल्फ़ाज़ों को ही लिख़ लेता हूँ आज ये ख़त तुझे भेज देता हूँ । थामे  हुए बहुत वक़्त हो चला है आज ये पैमाने ख़ाली कर आता हूँ । चंद लोग दिखे दुनिया के मेले में आज उन लोगो से मिल आता हूँ । बैठा हूँ बहुत रोज़ से इंतज़ार में आज़ कुछ देर मैं भी सो जाता हूँ । चंद सिक्के ये बहुत  भारी हो चले हैं, कृष्ण अब तुम ही संभालो चंद अल्फ़ाज़ कंहा कुछ बयां कर पाएंगे, कृष्ण अब तुम ही कुछ कहो । इंतज़ार बहुत हो चुका, आयो कृष्ण अब चलते हैं कुछ नए ख़त तुम्हारी लेखनी से ही लिख लेते हैं । आगे मेले में बहुत भीड़ होगी, आयो कृष्ण अब चलते हैं कुछ नयी खुशियां रास्ते में ही बिखेर देते हैं । अायो कृष्ण अब चलते हैं । सिक्के, अल्फ़ाज़, मुलाकात बहुत हो गया । आयो कृष्ण अब घर चलते हैं । आयो कृष्ण अब घर चलते हैं॥