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चलो कृष्ण अब चलो कृष्ण

बहुत देर से रुके हुए हो  चलो कृष्ण आज चलते हैं | बहुत कह लिया बेगानों से  चलो कृष्ण आज अपनों को सुनते हैं |  बहुत रह लिए किराये के घोंसलों में चलो कृष्ण आज दिल ढूँढ़ते हैं | बहुत शोर है यहाँ सब तरफ़  चलो कृष्ण आज अपने गीत गुनगुनाते हैं |  बहुत उम्मीद से लोग नाम लेते हैं चलो कृष्ण आज लिख ही देते हैं | बहुत बहुत हो लिया  चलो कृष्ण अब चलो कृष्ण !!!!  

आज चाय में फिर चीनी नहीं है

आज चाय में फिर चीनी नहीं है , उफ़, ये दिन फिर से वहीं है। उड़ कर आ जाता है रोज़ ये दिन, रात भर सोता नहीं तारे गिन गिन। आज चाय में फिर चीनी नहीं है , अहा, थिरकती हुई उम्मीद, थमी नहीं है। बारिशों में भीगी, भाग कर आई गोदी में मेरी सिमट, ऐसे ही सोयी। आज चाय में फिर चीनी नहीं है , हश्श, मेले में रोशनी कहीं कहीं है। छन छन के आती रही चाँदनी , शहर आज गर्म नहीं है। आज चाय में चीनी सही है , उंह, ये मीठी फिर भी नहीं है। उठ रही है भाप बहुत देर से, चाय अब ठंडी नहीं है।

आयो कृष्ण अब घर चलते हैं॥

चंद सिक्के हाथ में लिए चला जाता हूँ आज  कुछ खुशिया खरीद लाता हूँ । सोच रहा हूँ बहुत रोज़ से तेरे बारे में आज कुछ देर दर पर दस्तक दिए आता हूँ ।  चंद अल्फ़ाज़ों को ही लिख़ लेता हूँ आज ये ख़त तुझे भेज देता हूँ । थामे  हुए बहुत वक़्त हो चला है आज ये पैमाने ख़ाली कर आता हूँ । चंद लोग दिखे दुनिया के मेले में आज उन लोगो से मिल आता हूँ । बैठा हूँ बहुत रोज़ से इंतज़ार में आज़ कुछ देर मैं भी सो जाता हूँ । चंद सिक्के ये बहुत  भारी हो चले हैं, कृष्ण अब तुम ही संभालो चंद अल्फ़ाज़ कंहा कुछ बयां कर पाएंगे, कृष्ण अब तुम ही कुछ कहो । इंतज़ार बहुत हो चुका, आयो कृष्ण अब चलते हैं कुछ नए ख़त तुम्हारी लेखनी से ही लिख लेते हैं । आगे मेले में बहुत भीड़ होगी, आयो कृष्ण अब चलते हैं कुछ नयी खुशियां रास्ते में ही बिखेर देते हैं । अायो कृष्ण अब चलते हैं । सिक्के, अल्फ़ाज़, मुलाकात बहुत हो गया । आयो कृष्ण अब घर चलते हैं । आयो कृष्ण अब घर चलते हैं॥

तुझे याद कर फिर लौट रहा हूँ मैं।

आधी रात फिर उठ बैठा हूँ मैं। तुझे याद कर फिर सिमट रहा हूँ मैं। किसने क्या क्यूँ कहा भूल रहा हूँ मैं।   तुझे याद कर फिर झूल रहा हूँ मैं।   अकेले ही सबसे मिल रहा हूँ मैं। तुझे याद कर फिर खिल रहा हूँ मैं। सब कुछ जान कर भी अनजान बन रहा हूँ मैं। तुझे याद कर फिर इन्सान बन रहा हूँ मैं। गलत औ सही के पार उस मैदान पर पहुंच गया हूँ  मैं। तुझे याद कर फिर लौट रहा हूँ मैं। तुझे याद कर फिर लौट रहा हूँ मैं।

कृष्ण कहता है

कृष्ण कहता है - मोह न कर पर जब तू इठलाता है, पालने में न जाने तब कृष्ण कँहा चला जाता है । कृष्ण कहता है - संसार मिथ्या है पर जब तू चलता है, थामे ऊँगली मेरी, न जाने तब कृष्ण कँहा चला जाता है । कृष्ण कहता है - योगक्षेमं वहाम्यम् पर जब मैं पहुचता हूँ, घर थक कर, न जाने तब कृष्ण कँहा चला जाता है कृष्ण कहता है - निष्काम कर्म कर पर जब देखता हूँ, महीने में खाली जेब न जाने तब कृष्ण कँहा चला जाता है। कृष्ण कहता है - भविष्य की फ़िक्र न कर,  पर जब पाता हूँ तुझे देर रात में भी पढ़ते हुए  न जाने तब कृष्ण कँहा चला जाता है। कृष्ण कहता है - शांतचित्त से समर्पण कर  पर जब पहुचता हूँ मैं, हाथ जोड़ कर, न जाने तब कृष्ण कँहा चला जाता है । कृष्ण कहता था - साथ रहेगा वो सदा  अब जब भी चाहता हूँ मैं, भाग निकलना, न जाने तब कृष्ण कँहा से चला आता है। कृष्ण कहता था - तू मुझमे आ मिलेगा आज मैं आ गया हूँ बैकुण्ठ के द्वार पर वो देखो कृष्ण आ रहा है। वो देखो कृष्ण आ रहा है। । । इति श्री। ।

सब धुँआ है धुँआ, बस धुँआ है धुँआ

सब धुँआ है धुँआ, बस धुँआ है धुँआ ये ज़मीं आसमां, बस धुँआ है धुँआ। तुमने जो भी कहा, हमने जो भी सुना वो सब धुँआ है धुँआ, बस धुँआ है धुँआ। सब धुँआ है धुँआ, बस धुँआ है धुँआ ये ज़मीं आसमां, बस धुँआ है धुँआ। ये हँसी और ख़ुशी, वो नमी आँखो की बस धुँआ है धुँआ, सब धुँआ है धुँआ। तुमने जो भी कहा, हमने जो भी सुना वो सब धुँआ है धुँआ, बस धुँआ है धुँआ। ये जिंदगी ख्वाब  है, या ख्वाब है जिंदगी सब धुँआ है धुँआ, बस धुँआ है धुँआ। जो कहानी कही उस खुदा ने कभी, जज़्बात में है बंधी ये खुदाई कहीं  मेरी नज़रों में वो सब धुँआ है धुँआ, बस धुँआ है धुँआ।  सब धुँआ है धुँआ, बस धुँआ है धुँआ ये ज़मीं आसमां, बस धुँआ है धुँआ।

मेरी दिल्ली को मेरा सलाम है

थोड़ा झंझट है थोड़ा बबाल है,  इधर उधर का सबको ख्याल है,  मेरी दिल्ली तो एक कमाल है । कुछ आधा है तो कुछ अधूरा है कहीं कहीं ही कुछ पूरा है थोड़ा किस्सा है, थोड़ी कहानी है मेरी दिल्ली में एक रवानी है ।  सब कुछ दिखता है, कुछ भी बिकता है  हल्का हल्का भुनता औ धुनता है मेरी दिल्ली में कभी कुछ नहीं रुकता है । भीनी सी सुबह, महकी सी शाम है अजब सा चहुँ ओर घाम है मेरी दिल्ली एक ताम झाम है। खुदा की तारीफ है , राम की बलिहारी है  हर गली में राधा-श्याम की छटा न्यारी है  मेरी दिल्ली में हर ख़ास -ओ- आम है मेरी दिल्ली को मेरा सलाम है।  मेरी दिल्ली को मेरा सलाम है।